Everest Meri Shikhar Yatra class 9 sparsh-NCERT Chapter 3

Everest Meri Shikhar Yatra class 9 sparsh-NCERT Chapter 3

Everest Meri Shikhar Yatra एवरेस्ट मेरी शिखर यात्रा पाठ का सारांश प्रस्तुत पाठ हमारे देश की पहली महिला पर्वत रोही की आत्मकथा है। इस पाठ के माध्यम से लेखिका ने अन्य महिलाओं को प्रेरित किया है कि महिलाएं भी पुरुष प्रधान समाज में किसी से काम नहीं है।

लेखिका ने बताया है कि वह (Everest Meri Shikhar Yatra)एवरेस्ट विजय मिशन की सदस्य थी। वे इस अभियान दल के साथ-साथ मार्च 1984 को दिल्ली से काठमांडू हवाई जहाज में गई। अग्रिम दल ने पहले कठिन हिमपात के रास्ते को साफ किया। लेखिका जब नामचे बाजार पहुंची तब उन्होंने वहां से एवरेस्ट को पहली बार देखा।

वहां उस स्थान को सागरमाथा कहते हैं। लेखिका ने एवरेस्ट पर तेज हवा से बनने वाले बर्फ के बड़े फूलों को देखा तो लेखिका को वह लगा पूर्ण सी लेखिका वे चुनौती का सामना करना चाहती थी. 26 मार्च को अभियान दल पेरिस पहुंचा वहां पर उन्हें पता चला की बर्फ के खिसकने से खंबू हिमपात पर जाने वाले शेरपा कुलियाना में से एक कुली की मृत्यु हो गई है और चार घायल हो गए हैं।

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बेस कैंप में जलवायु परिवर्तन के कारण एक रसोईया सहायक की भी मृत्यु हो गई है। बेस कैंप तेनजिंग ने लेखिका का हौसला 19 अप्रैल को हुए 7900 मीटर ऊंचाई पर पहुंच गए।15 से 16 में 1984 को अचानक रात में कैंप तीन प्रोग्रेसिव टूट पड़ा।इससे कैंप तवा हो गया और लेखिका बर्फ में दब गई। लेखिका कुछ दिनों के बाद साउथ कॉल पर पहुंचीपर सुरक्षा का काम सचमुच साहसिक था।

बाकी सभी नौ घायल सदस्यों को बेस कैंप भेजना पड़ा। करनाल खुल्लर ने बछेंद्री को धीरज बंधाया।लेखिका ने साउथ पोल से अपनी महत्वपूर्ण चढ़ाई की शुरुआत कर दी। अगले दिन सुबह 6:20 पर वे और अंक दूर की साउथ पोल से निकल पड़े और 2 घंटे में वशिखर कैंप पर पहुंच गए। उन्होंने चाय पीकर नायलॉन रस्सी के सहारे यात्रा फिर शुरू की। यह 23 में 1984 का दिन था। (Everest Meri Shikhar Yatra)

वे दोपहर 1:07 पर एवरेज की चोटी पर खड़ी थी इस तरह से लेखिका ने एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला का गौरव गाथा लिखी। लेखिका ने घुटनों के बल बैठकर सागरमाथा के तक को चुम्मा। फिर दुर्गा मां तथा हनुमान चालीसा को कपड़ेमें लपेटकर बर्फ में दबा दिया। (Everest Meri Shikhar Yatra)

वहां उन्होंने राष्ट्रध्वज फहराया और छोटी सी पूजा अर्चना भी की। सभी सदस्य निरवाना बधाई विधि और करनाल खुल्लर ने कहादेश को तुम पर गर्व है। साथ ही तुम्हारे माता-पिता को भी बधाई। अब तुम नीचे जाओगी तब तुम्हें एक नया संसार देखने को मिलेगा। Everest Meri Shikhar Yatra

प्रश्न उत्तर – Everest Meri Shikhar Yatra एवरेस्ट मेरी शिखर यात्रा-

प्रश्न १ -अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?

उत्तर -अग्रिम दल का नेतृत्व उपनेत प्रेमचंद कर रहा था।

प्रश्न संख्या २ – लेखिका को सागरमाथा नाम क्यों अच्छा लगा?

उत्तर- एवरेस्ट शिखर दुनिया की सबसे ऊंची शिखर है। नेपालियों ने अपनी भाषा में प्रकृति से संबंधित सही नाम रखा इसलिए लेखिका को यह नाम अच्छा लगा था।

प्रश्न ३ – लेखिका को ध्वज जैसा क्या लगा ?

उत्तर – लेखिका को एवरेस्ट पर्वत शिखर पर बर्फ का बड़ा फूल ध्वज जैसा लगा।

प्रश्न संख्या ४ – हिमसखलन से कितने लोगों की मृत्यु हुई?

उतर – हिमसखलन से शेरपा कुलियों के दल में से एक की मृत्यु हुई और चार घायल हुए।

प्रश्न संख्या 5 – मृत्यु के अपवाद को देखते देखकर करनाल खुल्लर ने क्या कहा?

उत्तर – मृत्यु के अवसाद को देखकर करनाल खुल्लर ने स्पष्ट किया कि एवरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों और कभी-कभी तो मृत्यु को भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करनी चाहिए।

प्रश्न संख्या 6- रसोई सहायक की मृत्यु कैसे हुई?

उत्तर – जलवायु अनुकूलन ना होने के कारण एक रसोई सहायक की मृत्यु हो गई।

प्रश्न ७ – लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय किस तरह दिया?

उत्तर – लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय इस प्रकार दिया कि मैं बिल्कुल ही नौसीखीया हूं और एवरेस्ट मेरा पहला अभियान है।

प्रश्न संख्या 9-लेखिका की सफलता पर करनाल खुलने में उसे किन शब्दों में बधाई दी लेखिका की सफलता पर करनाल खुल्लर ने बधाई देते हुए कहा मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता-पिता को बधाई देता हूं देश को तुम पर गर्व है और तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा। Everest Meri Shikhar Yatra