Tughlaq dynasty:तुगलक वंश(1325 -1351) के शासक और प्रशासनिक कार्य!

  • गियासुद्दीन तुगलक
  • मोहम्मद बिन तुगलक
  • फिरोजशाह तुगलक
  • नसीरुद्दीन महमूद

Tughlaq dynasty-सम्पूर्ण इतिहास तुगलक वंश –

जब खिलजी वंश की समाप्ति हुई तब,गाजी मलिक ने 1320 में Tughlaq dynasty (तुगलक वंश ) की स्थापना की तथा अपना नाम गाजी मलिक से बदलकर गियासुद्दीन तुगलक रख लिया। इसने साम्रज्य को मजबूत तथा शक्तिशाली सेना त्यार की और मंगोलो के आक्रमण से भारत को सुरक्षित रखा। Tughlaq dynasty ने 1320 से लेकर 1414 ईस्वी तक सत्ता सभाली। चलिए सभी को विस्तार से समझते है।

गियासुद्दीन तुगलक(1320 से 1325 ईस्वी)- Tughlaq dynasty

 गियासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की थी। तुगलक किसी वंश का नाम नहीं था। गियासुद्दीन के नाम गाजी तुगलक अथवा गाजीबेग तुगलक था। इस कारण उसके उत्तराधिकारीयों को भी इस तुगलक पुकारा जाने लगा। 

गियासुद्दीन ने उदारता की नीति अपनाई जिसे बरनी ने रस्मोनियम अथवा मध्यम पंथी नीति कहा है।  उसने सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करवाई और नहरों का निर्माण करवाया। इसने किसानों को और राज्य की आर्थिक नीतियों में भी बहुत सुधार किया।

 इसी ने डाक व्यवस्था को सर्वश्रेष्ठ बनाया। तथा न्याय व्यवस्था में भी सुधार किया इसने तुगलकाबाद नामक शहर की स्थापना की थी। गियासुद्दीन ने सरकारी कर्मचारी को राजस्व वसूलने में हिस्सा न देकर उन्हें कर मुक्त जागीरे दी । 

चिश्ती संत निजामुद्दीन औलिया के साथ इसके संबंध अच्छे नहीं थे। जब गियासुद्दीन बंगाल अभियान से लौट रहा था तब उसने दिल्ली आने से पहले ही ओलिया को दिल्ली छोड़कर चले जाने को कहा था। यह सुनकर निजामुद्दीन औलिया ने कहा था। हनुज -ए -दिल्ली दूरस्त (अर्थात दिल्ली अभी दूर है ) 

गियासुद्दीन जब अफगानपुर नामक गांव में विश्राम कर रहा था। तो लकड़ी के महल की छत से गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गई। इबनबतूता के अनुसार गियासुद्दीन तुगलक की मौत के कारण मोहम्मद बिन तुगलक का षड्यंत्र था। उसे उसके द्वारा तुगलकाबाद में बनाए गए कर कब्र में दफना दिया गया। 

इन्हे भी पढ़े –slave dynasty

मोहम्मद बिन तुगलक 1325 से 1391 ईसवी–  Tughlaq dynasty

मोहम्मद बिन तुगलक का मूल नाम जूनाखा था। इसने इसने उलुगखां की उपाधि धारण की थी। यह गियासुद्दीन का पुत्र था। 

उस के शासनकाल में 1333 ईस्वी में मोरको का यात्री इब्नबतूता भारत आया था। जिसे दिल्ली काजी नियुक्त किया गया था। 1342 ईस्वी में इबनबतूता को अपना दूत बनाकर चीन भेजा। इसने सिक्कों पर सुल्तान ईश्वर की छाया अंकित करवाई थी। 

इसके शासनकाल में साम्राज्य 23 प्रांतों में बटा हुआ था। कश्मीर और आधुनिक बलूचिस्तान को छोड़कर पूरा हिंदुस्तान दिल्ली संतान सल्तनत के नियंत्रण में था। 

प्रशासनिक परिवर्तन – Tughlaq dynasty  

यह दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने योग्यता के आधार पर पद देना आरंभ किया और भारतीय मुसलमानों एवं हिंदुओं को भी सम्मानित पद प्रदान किया। इसने दोआब  में कर वृद्धि की।  इसने कृषि की उन्नति के लिए एक नया विभाग खोला और एक नया मंत्री जीसे अमीर- ए -कोही जाता था।  

इन्हें भी पढ़े –Turkey Invasion:Lets know facts about turky invasion!

राजधानी परिवर्तन (1326 से 1327) – Tughlaq dynasty

इसने अब दिल्ली से 1500 किलोमीटर दूर अपनी राजधानी रखी। जिसका देवगिरी नाम से स्थानांतरित कर दौलताबाद रख दिया।

सांकेतिक मुद्रा 1329 से 30 ईसवी –

मोहम्मद तुगलक की एक और असफल योजना थी। प्रतीक मुद्रा का चलन आरंभ करना उस समय चांदी के सिक्कों को टंका का तथा तांबे के सिक्के को जीतल कहा जाता था। इस मुद्रा का चलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कमी का सामना करने के लिए किया गया था। इसने तांबे या पीतल के सिक्के भी चल बाय। इससे पहले चीन के कुबलई खां के समय सांकेतिक मुद्रा का चलन सफलतापूर्वक किया गया था। 

इन्हे भी जाने –khiilji dynasty:Learn story of 3 ruler and kohinoor

मोहम्मद तुगलक के अभियान- Tughlaq dynasty

किसके काल में एकमात्र मंगोल आक्रमण 1328 से 1329 ईसवी में हुआ अलाउद्दीन तामार्शिरीन  के नेतृत्व में।  मोहम्मद तुगलक ने खुरासान को जीतने की योजना बनाई जो कार्य रूप में परिणित ना की जा सकी और सुल्तान ने सेना को भंग कर दिया।

मोहम्मद तुगलक ने 1337 से 38 ईसवी में कुराचील अभियान किया जिसका उद्देश्य उन पहाड़ी राज्यों को अपनी सीमा में लाना था। जहां अधिकांश विद्रोहियों को शरण प्राप्त होती थी। यह स्थान आधुनिक हिमाचल प्रदेश की कुमायूं जिले में थी।

इस आक्रमण से सुल्तान की सैन्य शक्ति कमजोर पड़ गई। इसने निजामुद्दीन औलिया के कब्र पर मकबरे का निर्माण कराया था। इसने तुगलकाबाद के पास आदिल बाद नामक दुर्ग बनवाया था। 

मृत्यु-

एक विद्रोह के दमन के दौरान सिंध में मोहम्मद बिन तुगलक बीमार हो गया। और 20 मार्च 1351 ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई। बदायूनी के अनुसार सुल्तान को उसकी प्रजा से और प्रजा को उसके सुल्तान से मुक्ति मिल गई।


फिरोजशाह तुगलक 1351 से 1388 ईस्वी – Tughlaq dynasty

जिस समय मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हुई। तब फिरोज उसके साथ था। 23 मार्च 1351 ईस्वी फिरोजशाह सुल्तान बना। फिरोज मोहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई था। 

फिरोज शाह का आंतरिक शासन

 राजस्व व्यवस्था :

फिरोज शाह ने इस्लामी कानून के आधार पर केवल चार कर लगाए थे। खराज, खम्स, जजिया जकात। इसने चौबीस कष्टदायक करो को समाप्त कर दिया।  फिरोज ने हब्र ए शब्र  शब्द नामक सिंचाई कर लिया जो ऊपर का 1/ 10 भाग होता था। फिरोज ने  तकावी ऋण माफ कर दिया। इसने समय लगान पैदावार का 1/ 5 से 1/ 3 भाग था। इसने शशगनी नामक सिक्का चलाया। अफीफ  के अनुसार सुल्तान ने अद्धा एवं बिख  नामक तांबा और चांदी का सिक्का चलाया। 

सिंचाई व्यवस्था

 फिरोज ने पांच बड़ी नहरों का निर्माण कराया। जिसमें यमुना नदी से हिसार तक 150 मील लंबी नहर थी। इसने सिंचाई और यात्रियों की सुविधा के लिए 150  कुएं  खुदवाए । 

नगर और सार्वजनिक निर्माण कार्य

 फिरोज ने फतेहाबाद हिसार फिरोजपुर और फिरोजाबाद नगर बसई। इसने दिल्ली में फिरोज शाह कोटला कहलाने वाला नगर बहुत पसंद था। इसने मोहम्मद बिन तुगलक की याद में जौनपुर नगर की स्थापना की। फिरोज ने ताश घड़ियाल एवं  एक जलघडी का भी निर्माण कराया था।

इसमें अशोक के 2 स्तंभों को दिल्ली मंगवाया। इनमें से एक मेरठ और दूसरा पंजाब में लगाया गया। फिरोज ने कुतुब मीनार की चौथी मंजिल के स्थान पर दो और मंजिलों का निर्माण कराया इस प्रकार  कुतुबमीनार अब पांच मंजिला बन गया था। 

परोपकारी कार्य 

इतने दीवाने एक खैरात विभाग स्थापित किया जो मुसलमान अनाथ स्त्रियों एवं विधवाओं को आर्थिक सहायता देता था। इसने दिल्ली के निकट एक खैराती अस्पताल दार उल शफा स्थापित कराया।  फिरोज ने दीवाने इतिहास की स्थापना की जो मृत सैनिकों के आश्रितों को मदद देने से संबंधित था। इसने गुलामों के लिए एक पृथक विभाग दीवाने बागान बनवाया। 

शिक्षा-  Tughlaq dynasty

फिरोज विद्वानों का सम्मान करता था उस के दरबार में बरनी एवं शमसे सिराज अफीफ जैसे विद्वान निवास करते थे।

धार्मिक नीति- 

फिरोज ने राज्य के शासन व्यवस्था में इस्लाम के कानून और उलेमा वर्ग को प्रधानता दी। यह सूफी संत बाबा फरीद का अनुयाई था। 

यह बहुसंख्यक हिंदुओं के प्रति कठोर था। फिरोज ने खलीफा से दो बार अपने सुल्तान के पद की स्वीकृति ली और अपने को खलीफा का नायब पुकारा।

अन्य तथ्य- आधुनिक इतिहासकार  एलफिंस्टन ने फिरोज को सल्तनत युग का अकबर कहा है।

नासिरुद्दीन महमूद (1394-1412) – Tughlaq dynasty

यह तुगलक वंश का अंतिम शासक था। उसका शासन दिल्ली तक ही सीमित था। इस के शासनकाल में मंगल तैमूर लंग ने 1398 ईसवी में भारत पर आक्रमण किया। नासिरुद्दीन की मृत्यु 1412 ईस्वी में हो गई जिसके बाद Tughlaq dynasty (तुगलक वंश) समाप्त हो गया। 1412 ईस्वी में दौलत खान लोदी सुल्तान बना, परंतु खिज्र खां  दिल्ली पर आक्रमण किया और उसे परास्त कर स्वयं 1414 ईस्वी को दिल्ली से सिंहासन  पर बैठे एक नवीन राजवंश यानी सैयद वंश की स्थापना की।

आशा है दोस्तों आपको Tughlaq dynasty के विषय में सभी तथ्यों की आपने समझा होगा। इसके सभी शासक तथा इनके कार्यो की जानकरी रोचक लगी होगी। इस विषय में अगर कोई प्रश्न या सुझाव हो तो मुझे अवगत कराए धन्यवाद।

1 thought on “Tughlaq dynasty:तुगलक वंश(1325 -1351) के शासक और प्रशासनिक कार्य!”

Leave a Comment