Kriya-kriya kise kahte hai ?kriya ke bhed !

Kriya-क्रिया किसे कहते है ?

Kriya-दोस्तों आज के इस पृष्ठ में हम क्रिया को समझने का प्रयास करेंगे। जिसमें हम क्रिया किसे कहते हैं क्रिया के भेद के साथ-साथ इसके सभी सबभेदों की चर्चा उदाहरण के साथ बहुत ही विस्तृत और सरल तरीके से समझने का प्रयास करेंगे। चलिए एक उदाहरण देखते हैं –

गांँव के मेले की शोभा देखते बन रही थी कहीं झूला वाला बच्चों को झूला में बैठाकर झूला झुलाते दिखाई दे रहा है। तो कहीं चूड़ीवाला औरतों को चूड़ी पहना रहा है। कहीं कुमहार के द्वारा सुंदर-सुंदर मिट्टी के खिलौने बनाए जा रहे हैं। तो कहीं पर बुने हुए भुट्टो की महक चारों तरफ फैल रही है। ऊपर लिखे वाक्यों में रंगीन किए हुए शब्द कार्य होने का बोध करा रहे हैं। इसी कार्य का होना या करने का बोध क्रिया कहलाता है अर्थात  

जिससे किसी कार्य के करने का ज्ञान हो या फिर किसी घटना के घटित होने का संकेत मिले उसे क्रिया कहेंगे। 

kriya
Kriya

Kriya क्रिया के भेद

मूल क्रिया– जैसे भाषा में कुछ शब्द रूढ़ हो गए थे ठीक उसी तरह क्रिया में भी कुछ शब्द रूठ हो जाते हैं यह प्रचलित रूढ़ शब्द मूल क्रिया या फिर सरल  क्रिया कहलाते हैं जैसे- खाना-पीना पढ़ना लिखना आना-जाना आदि। मूल क्रिया दो तरह के होते हैं अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रिया। अकर्मक क्रिया वाक्य में जो क्रिया कर्म की अपेक्षा नहीं रखती अकर्मक क्रिया कहलाती है। तथा सकर्मक क्रिया जो क्रिया कर्म की अपेक्षा रखती है उसे सकर्मक क्रिया कहते है।

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अकर्मक क्रिया दो प्रकार की होती है। 

1 पूर्ण अकर्मक क्रिया– वह क्रिया जो अपने आप में पूर्ण होती है। यह अपना अर्थ व्यक्त करने में स्वयं सक्षम होती है। पूर्ण अकर्मक क्रिया कहलाती है इसके भी दो भेद होते हैं। 1 अवस्था/ अस्तित्व वाची अकर्मक क्रिया– इनके द्वारा करता की स्थिति/अवस्था का पता चलता है।  जैसे ईश्वर है (विद्यमान है)। श्याम सो रहा है सोने की स्थिति ,रोशनी गाती है गाने की अवस्था। 2 गति बोधक/ गतयर्यक पूर्ण अकर्मक क्रिया-इन क्रियाओं को करते समय कर्ता  गतिशील स्थिति में होता है जैसे दौड़ना, भागना, चलना, फिरना, उठना, तैरना, आना-जाना, इत्यादि जैसे- रिधिमा भोपाल जा रही है। बगुला झील में तैर रहा है।

2 अपूर्ण अकर्मक क्रिया -कुछ प्रकार की क्रिया स्वतंत्र रूप से अपने अर्थ को व्यक्त करने में सक्षम नहीं होती है। इन्हें किसी न किसी रूप से कर्ता  से इन्हें संबंध रखना ही पड़ता है जैसे लगना, होना, निकलना, रहना, दिखाना आदि ऐसे शब्द अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे -मोहन बेईमान निकला। अफसर ईमानदार है। या फिर वह अस्वस्थ है। 

Kriya-सकर्मक क्रिया दो प्रकार के होते हैं। 

1 पूर्ण सकर्मक क्रिया- जो अपने अर्थ को स्वयं ही व्यक्त करने में सक्षम होती है पूर्ण सकर्मक क्रिया कहलाती है यह भी दो तरह की होती है। १  एककर्मक पूर्ण सकर्मक क्रिया- वह सकर्मक क्रिया है जो एक कर्म लेती हैं वह एक कर्मक कहलाती है। जैसे स्वप्निल हारमोनियम बजा रहा है। सुलेखा पत्र पढ़ रही है। बच्चे फुटबॉल खेल रहे हैं।  दविकर्मक पूर्ण सकर्मक क्रिया- जिसमें दो क्रियाएँ  दो कर्म को बताती हो उसे  दविकर्मक पूर्ण सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे सुमन ने मोहिता को पुस्तक दी सुवर्णा ने मौसी को पत्र भेजा रितिक ने सोम से खिलौना खरीदा। अगर वाक्य में क्रिया पर क्या के उत्तर में निर्जीव वस्तु आए जैसे- पुस्तक, खिलौना पत्र आदि तो वह प्रत्यक्ष कर्म कहलाती है। और किसे किसको के उत्तर में यदि सजीव संज्ञाएँ जैसे सुमन, मौसी, सीमा, चाची  आए तो वह अप्रत्यक्ष कर्म कहलाती है। 

2 व्युत्पन्न क्रिया – जो क्रियाएँ मूल क्रियाओं से उत्पन्न होती है वह व्युत्पन्न क्रिया कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है।

प्रेरणार्थक क्रिया और व्युत्पन्न अकर्मक क्रिया। 

प्रेरणार्थक क्रिया -प्रेरणार्थक क्रिया और सकर्मक क्रिया दोनों अलग-अलग होते हैं दोनों को मिलाना नहीं चाहिए। जैसे स्नेहा  पतंग उड़ा रही है। स्नेहा तितली उड़ा रही है। पहले वाक्य में क्रिया उड़ाना सकर्मक क्रिया है कारण प्रश्न करने पर कि क्या उड़ा रही है तो उत्तर में प्रथम पतंग निर्जीव संज्ञा आ रहा है अतः पतंग उड़ाने का कर्म है दूसरे वाक्य में भी ऐसा ही प्रतीत होता है परंतु ऐसा नहीं है। संरचना से लगता है पर अर्थ की दृष्टि से  दोनों में अंतर है।

दूसरे वाक्य में देखें क्या उड़ा रही है ? उत्तर तितली,जो  तितली निर्जीव संज्ञा नहीं है तब यह प्रत्यक्ष कर्म नहीं है यह क्रिया सकर्मक नहीं है पतंग निर्जीव है। अतः स्नेहा  उसमें डोरी बांधकर उड़ा रही है।पर दूसरे उदाहरण में  तितली को उड़ाने के लिए और प्रत्यन करती है, पकड़ने का प्रयास करती है, ताली बजाती है और तितली उड़ जाती है। स्पष्ट है कि वह तितली को उड़ाने के लिए प्रेरित करती है। तितली उड़ती तो स्वयं ही है पर दो बातें साफ है। स्नेहा  तितली को उड़ाने के लिए प्रेरित कर रही है प्रेरणा पाकर तितली खुद ही उड़ रही है। अतः पहले वाक्य में क्रिया एक ही थी पर दूसरे में दो क्रिया आए हैं। इसलिए यह प्रेरणार्थक क्रिया कहलाती है।

 व्युत्पन्न अकर्मक क्रिया– प्रेरणार्थक क्रियाओं की तरह यह भी मूल सकर्मक क्रियाओं से व्युत्पन्न  होती है। जैसे -खोलने से खुलना, उठाना से उठना, उड़ाना से उड़ना। मूल अकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया संरचना से एक सी प्रतीत होती है लेकिन अर्थ की दृष्टि से इनमें अंतर  समझा जा सकता है। जैसे चिड़िया उड़ रही है (अकर्मक क्रिया) पतंग उड़ रही है (व्युत्पन्नअकर्मक क्रिया) 

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Kriya- नामधातु क्रिया

संज्ञा सर्वनाम विशेषण आदि से जो धातुएँ बनती है वह नामधातु कही जाती है; जैसे-

  • संज्ञा से खर्च – खर्चना रंग -रँगना।
  • विशेषण से – गर्म – गर्माना, दोहरा -दुहराना।
  • सर्वनाम से -अपना-अपनाना।
  • अनुकरणवाची -हिनहिन -हिनहिनाना आदि।

समस्त क्रिया– यह क्रिया दो धातुओं के योग से बनती है,इसमें दोनों क्रियाओं का अर्थ बना रहता है; जैसे -अब सुरेश उठ बैठ सकता है। डॉक्टर ने चलने फिरने की आज्ञा नहीं दी है। मैं घूम फिर के आया हूँ। उपयुक्त वाक्यों में उठना बैठना अर्थात उठ भी सकता है बैठ भी सकता है चलना फिरना अर्थात चल भी नही सकता है। घूम फिर अर्थात घूम सकता है। इसमें दोनों का अर्थ बना  रहता  हैं।  

मिश्र  क्रिया – इस क्रिया की यह विशेष्ता है की इसमें पहला भाग संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण का रहता है और दूसरा भाग क्रिया का रहता है। इस क्रिया को क्रियाकर कहते हैं;जैसे-याद+आना=याद आना(याद संज्ञा है),प्यारा +लगना =प्यारा लगना (प्यारा विशेषण है ),भीतर +करना =भीतर करना (भीतर क्रियाविशेषण है )

संयुक्त क्रिया- यह भी समस्त क्रिया की भांति दो धातुओं से तो बनती है पर इसमें यह अंतर है की मुख्य अर्थ पहले वाली क्रिया में रहता है। मतलब पहले वाली क्रिया प्रधान होती है; जैसे- कर लेना, चल देना, आ जाना आदि इसमें दो दो क्रियाएं हैं  लेकिन अर्थ पहले वाली से ज्ञात हो रहा है; जैसे – बादल घिर आयी,श्यामला घर पहुँच गयी,संगीता प्रायः पार्क में घुमा करती है। (करती रंजक क्रिया हैं। )

रंजक क्रिया -रंजक क्रिया आठ होती है। -आना,जाना,उठना,बैठना,देना,लेना डालना,पड़ना। कुछ प्रचलित रंजक क्रिया -मारना,बसना,निकलना आदि।

तो दोस्तों आज हमने सीखा जिस पद से किसी के काम करने का बोध हो उसे क्रिया कहते है। साथ ही साथ क्रिया के सभी भेदों का जाना। आशा है दोस्तों यह भाग आपको पसंद आया होगा,आपके सुझाओं का इंतज़ार रहेगा धन्यवाद।

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