Shabd aur pad:4 Important classification of shabd aur pad

Shabd aur pad शब्द किसे कहते है ?

दोस्तों आज के इस हिंदी व्याकरण के पोस्ट Shabd aur pad(शब्द और पद ) में हम शब्द और पद की व्याख्या करेंगे। इसमें हम शब्द क्या है? पद किसे कहते है ? शब्द के भेद,शब्द की उत्पत्ति,अर्थ के आधार पर शब्द के भेद, प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद, साथ ही साथ रचना के आधार पर तथा अन्य चीजों को उदाहरण के साथ सरल तरीके से समझने का प्रयास करेंगे। तो चलिए शुरू करते है। ध्वनि के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिसका कोई अर्थ हो तथा जिसके बोलते ही उसका तस्वीर हमारे मन मस्तिष्क में उभरने लगे। जैसे- कुर्सी-क+उ +र् +अ +स्+ई नदी-न+अ+द्+ई आदि । ये शब्द कहलाते है।

वर्णों के समूह को शब्द कहते हैं।

पद किसे कहते हैं?

Shabd aur pad जब शब्दों को एक वाक्य में प्रयुक्त करते हैं तब यह पद बन जाते हैं। क्योंकि वाक्य में आते ही शब्द अपने लिंग,वचन,कारक,प्रत्यय,उपसर्ग आदि कई कारणों से अपने में बदलाव लाते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि वाक्य में जाते ही शब्द में कोई परिवर्तन या बदलाव ना हो। इसके बाबजूद भी हम इसे पद ही कहेंगे। जैसे लड़का गेंद खेलता है। इसमें लड़का और गेंद में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है। फिर भी यह पद है ऐसा क्यों ? इसका कारण समझते है।

दोस्तों हम सभी ने कभी न कभी प्रयोगशाला में प्रयोग तो किया ही होगा या फिर गया या देखा जरूर होगा। जब हम कोई प्रयोग करते हैं तो एक साल्ट में दूसरा रसायन मिलाते हैं। तो कभी-कभी परिवर्तन दिखता है तो कभी-कभी परिवर्तन नहीं भी दिखता है।

लेकिन साल्ट में दूसरा रसायन मिलाते ही इक्वेवेशन बदल जाता  है। ठीक इसी तरह जब शब्द वाक्य में आते ही इसका इक्वेवेशन बदल जाता है और वह पद कहलाने लगता है। अर्थात जब कोई शब्द वाक्य में व्यवस्थित होकर एक अर्थ को स्पष्ट करने लगे तो उसे पद कहेंगे।

शब्द का वर्गीकरण- शब्दों का वर्गीकरण चार आधार पर किया जाता है।

  • 1 उत्पत्ति के आधार
  • 2 अर्थ के आधार पर
  • 3 प्रयोग के आधार पर
  • 4 रचना के आधार पर। 

उत्पत्ति के आधार पर पाँच भागों में बाटते है। 1 तत्सम 2 तद्भव 3  देशज 4 विदेशज 5 संकर। उत्पत्ति के आधार पर उत्पत्ति यानी जन्म के स्रोत के आधार पर इसे दो भागों में बांटते हैं पहला तत्सम और दूसरा तद्भव । 

तत्सम- हम जानते हैं कि हिंदी के कई शब्द संस्कृत से आए हैं । वैसे शब्द जो संस्कृत से आए हैं और उसमें कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ हो तो वह तत्सम कहलायेगा । अर्थात वह शब्द जो संस्कृत में जैसा था वैसे ही हिंदी में जस का तस है तो ऐसे शब्दों को हम तत्सम शब्द कहते हैं । जैसे भूमि,राष्ट्र,रक्षा प्रथा,मयूर आदि। तद्भव -(तत्सम के उल्ट )वह संस्कृत का शब्द जो हिंदी के प्रकार के अनुसार ढल गया है तथा उसमें कुछ न कुछ परिवर्तन हो गया हो उसे तद्भव कहते हैं । जैसे कार्य- काम, माता- मां, सर्प – सांप को इस परिवर्तित शब्द को तद्भव कहते हैं।

दोस्तों  हम देखते हैं कि तत्सम और तद्भव में हम हमेशा कंफ्यूज हो जाते हैं कौन तत्सम है और कौन तद्भव । तो एक सरल तरीके से हम इन दोनों को याद रख सकते हैं तत्सम शब्द जिसके अंत में सम है अर्थात सम का मतलब समान (बराबर) मतलब संस्कृत और हिंदी में एक समान शब्द यानि तत्सम । शायद यह ट्रिक आपको याद रखने में मदद करें।

इन्हें भी पढ़े – phonology(Varna vichar) Learn 2 fundamental units of Hindi

तत्सम और तद्भव शब्दों की सूची-

तत्समतद्भव
अंधकारअँधेरा
अम्बाअम्मा
अग्निआग
अष्टआठ
उष्ट्रऊँट
कपाटकिवाड़
कर्मकाम
कार्यकाज
काष्ठकाठ
कूपकुँआ
कोकिलकोयल
गृहघर
चंद्रचाँद
चर्मचमड़ा
छिद्रछेद
तत्सम तद्भव शब्दों की सूची

विदेशज शब्द- विदेश यानी जिसकी उत्पत्ति विदेशी भाषाओं से हुई है और हिंदी में समाहित हो गई है। हिंदी में अरबी फारसी अंग्रेजी तुर्की चीनी ड्रंच पुर्तगाली स्पेनिश रूसी आदि से कई शब्द आए हैं इन सभी शब्द आए हुए शब्दों को विदेशी शब्द कहते हैं ।

विदेशी शब्द की लिस्ट।

  • अरबी -गरीब,जिला,ताबीज,तैनात,फ़ायदा,मज़ाक,मुनाफ़ा,मुफ़्त,मुबारक़,मुमकिन,मुल्क,हिम्मत,हुक्म,हुजूर,हैवान।
  • फ़ारसी -कागज,गुजारिस,चुस्त,आदि।
  • अंग्रेजी -अलार्म,कार,कूलर,पैंट,,फिल्म।फ्राक,आदि।
  • तुर्की -चम्मच,चाकू,तलास तोप,सौगात,संदूक,
  • पुर्तगाली -अलमारी,आलपीन,कप्तान,कमीज़,चाबी,आदि।
  • फ़्रांसिसी -कूपन,कारतूस,काजू।
  • चीनी -चीकू,लीची,चाय।

संकर शब्द – दो अलग-अलग भाषाओं से मिलकर बने शब्द संकर शब्द कहलाते हैं जैसे -रेलगाड़ी,पुस्तकालय ।

देशज शब्द – देश का अर्थ देश का यानी देश में जन्म कहने का मतलब वह शब्द जो देश के ही अन्य भाषाओं से लिया गया है । जैसे- पगड़ी,खिड़की,लोटा,आदि।

Shabd aur pad-अर्थ के आधार पर-

  • एकार्थी शब्द– वैसे शब्द जिनका एक ही निश्चित अर्थ होता है उस शब्द का कोई और अर्थ न हो  जैसे -पुस्तक, लड़की, कुर्सी, घर आदि।
  • अनेकार्थी शब्द- वैसे शब्द जिसका एक से ज्यादा अर्थ होता है तथा वाक्य के आधार पर उसका अर्थ निकाले जाते है। जैसे अंबर- कपड़ा /आकाश। पत्र- चिट्ठी/ पत्ता।
  • पर्यायवाची शब्द – ऐसे शब्द जिनका अर्थ समान हो परंतु उनके अनेक नाम हो जैसे आग का अग्नि /अनल या फिर आकाश का अंबर/ गगन। ऐसे शब्द को पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
  • विपरीतार्थक शब्द– एक दूसरे के विपरीत अर्थ रखने वाले शब्द को विलोम शब्द या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। जैसे जड़ का चेतना, कोमल का कठोर, गरम का ठंडा आदि।
  • श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द- ऐसे शब्द जो सुनने में समान परंतु उनके अनेक अर्थ हो जैसे -अन्न का अनाज। अन्य का दूसरा, अवधी मतलब समय ,अवधि मतलब अवध की भाषा।

Shabd aur pad-प्रयोग के आधार पर-

जब भाषा में शब्दों का इस्तेमाल होने लगा तब व्याकरण की दृष्टि से वे जिस कार्य के लिए बने हैं उसी के अनुसार उन्हें संज्ञा,सर्वनाम आदि रूपों में समझा जाने लगा। इसी आधार पर शब्दों Shabd aur pad को दो भागों में बांटा गया। विकारी शब्द -ऐसे शब्द जिसमें लिंग वचन काल कारक आदि के कारण परिवर्तन (विकार) आता है उसे विकारी शब्द कहते हैं। जैसे लड़का से लड़के या फिर लड़कों आदि। संज्ञा,सर्वनाम, विशेषण,क्रिया विकारी शब्द के अंतर्गत आते हैं।अविकारी शब्द -ऐसे शब्द जिसमें लिंग,वचन,काल के कारण कोई बदलाव नहीं होता है। वह हर परिस्थिति में एक ही रूप में रहते हैं अविकारी शब्द कहलाते हैं। इन्हें अवयव भी कहा जाता है। क्रियाविशेषण, समुच्चयबोधक संबंधबोधक,विस्मयादिबोधक और निपात अविकारी शब्द है। जैसे- जहाँ, लगभग,क्योंकि,अनंत,आदि।

रचना के आधार पर-

रूढ़ शब्द- जो शब्द किसी वस्तु विशेष के लिए ही प्रयुक्त होता है जो अपने मूल रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं वह शब्द रूढ़ शब्द कहलाते हैं। जैसे -कुर्सी, फूल आदि। रूढ़ शब्दों को खंड करने पर खंड का कोई भी अर्थ नहीं निकलता है। जैसे- नाक,बाल,जल,सब आदि । यौगिक शब्द -जो शब्द दो या दो से अधिक शब्द या शब्दांश के योग से बने हैं तथा खंड करने पर प्रत्येक खंड का अर्थ निकले यौगिक शब्द कहलाते हैं। जैसे -घोड़ा+ सवार = घुड़सवार राज+ कुमार = राजकुमार प्रधान +मंत्री= प्रधानमंत्री। योगरूढ़ शब्द -जो शब्द दो शब्दों के मेल से बने हैं लेकिन रूढ़ शब्द की तरह किसी विशेष अर्थ का ही बोधक हो  वह योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं। जैसे चारपाई अर्थात चार पाए हैं जिसका लंबोदर लंबा है उदर जिसका दशानन,जलज,पितांबर,महावीर आदि।

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